Kadach.Shayad.Maybe – A soliloquy of despair : announcing the Hindi music video

14 01 2015

kadach poster2

प्रिय स्वजन,

कहते है की वेदना में से ही संवेदना जनम लेती है। २ साल पहले, निर्भया अत्याचार के अगले दिन जब अख़बार में उस दुर्घटना के बारे में पढ़ा , तो एक असह्य पीडा का अनुभव हुआ। कई दिनों तक आँखों से आंसू निकलते रहे। वो पीड़ा , को वेदना मुझमे से एक काव्य के रूप में प्रकट हुई। मेरे शिक्षक और मेरे मित्रो के प्रोत्साहन से प्रेरित होके उस काव्य को एक अच्छे कारण केलिए आप सब तक पहुचने का प्रयास किया है।

हम जिस २१मि सदी का गर्व करते है, वही २१मि सदी में एक जीव दूसरे जीव पे इतना घिनौना अत्याचार कर सकता है , ये हकीकत को स्वीकार करना मेरे लिए असंभव था। हम सब जानते है, की इस कक्षा के अत्याचार समाज में सदियों से चलते आ रहे है, और काफी मात्रा में फैले भी है। पर उस दिन उस दुर्घटना को जान मैं वो वेदना से रूबरू हो सका। जानता हु के वो असह्य पीड़ा कैसी होगी, और उस जीव ने क्या सहन किया होगा उसका एक अंश भी मैं जान या समझ नहीं पाउँगा, और प्रार्थना करूँगा के किसी को भी ऐसी वेदना सहन न करनी पड़े ; पर ऐसे अत्याचार में से उमटती वेदना के साथ हम सबकी संवेदना मिले वो हमारे समाज केलिए बहुत ज़रूरी है।

‘शायद’ – अ सोलिलोकी ऑफ़ डिस्पेर (निराशा का आत्मभाषण), वो घिनौने अत्याचार गुज़ारा गया हो ऐसी एक स्त्री की वेदना का आत्मभाषण है। अगर वो पीड़ित स्त्री को शब्द मिले तो क्या वो गुस्सा होगी या अपनी निराशा बयान करेगी ? ‘शायद’ वो निराशा है. ‘शायद’ वो हर पुरुष को याद करवाता है, के वो उसके जीवन में होती हर एक स्त्री के पोषण का योगफल है।

लज्जाजनक हकीकत है की फिर भी स्त्री पे अत्याचार गुज़ारते वक़्त पुरुष उन स्त्रिओ का योगदान भूल जाता है , और स्त्री में माता, बहन, सखी, जीवनसंगिनी या बेटी का रूप देख नहीं पाता। ये पीड़ा, निराशा और वेदना से भरे काव्य को – संगीत और दृश्य के सहारे आप सब के सामने प्रस्तुत करने का हमारा प्रयत्न है – ‘शायद’

आशा है की इस वेदना को समझ के, शायद हम सब में संवेदना जनम ले और हम एक ऐसी दुनिया का सपना देखने सक्षम बने, के जिसमे कोई जीव दूसरे जीव पे हिंसा न करे।

उत्तरायन याने पृथ्वी की स्थिति में बदलाव। अगले ६ महीने पृथ्वी सूरज की तरफ ढली रहे ऐसी स्थिति बनी रहेगी। यही समय है नयी शरुआत का , नयी परिस्थिति का निर्माण करनेका।

मेरे जीवन काल में मैं हिंसा और अत्याचार से मुक्त दुनिया देख सकु उस उद्देश्य के साथ , एक कलाकार की हैसियत से , इस म्यूसिक विडिओ के रूपमे, मेरा एक छोटा सा योगदान।

बहुत ही उम्दा और समरुचिपूर्ण कलाकारों के साथ मिलके जो सर्जन किया है , वो संक्रांति के ये पल पर ( 19.34.43 IST 14 जनवरी 2015) दुनिया को अर्पित करता हु।

अगर आपके दिल तक हमारी बात पहोच सके तो दूसरे दिलो को भी इस संवेदना के अनुभव से जोड़े। हमारी प्रस्तुति एक नेक विचार के सिंचन का साधन बने वही अपेक्षा के साथ…

आपका और सबका,
मिहिर गजरवाला

नीचेकी लिंक पे क्लिक करने से विडिओ देख सकेंगे

‘शायद’ (Hindi version) : https://www.youtube.com/watch?v=wbfEqH71FTw

Advertisements

Actions

Information

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s




%d bloggers like this: